PovertyMedia and Rights Food Security Livelihood Disability Women Rights Globalisation Health Social Exclusion Education Child Rights Environment Right to Information and Governance

 

     
 
| Print this Page
 
     
  YOU ARE HERE: Home > Social Exclusion > Madhya Pradesh Mein Sampradayik Hinsa Ka Silsila Jari  
     
  मध्यप्रदेश में साम्प्रदायिक हिंसा का सिलसिला जारी
 
     
 

प्रदेश में साम्प्रदायिक घटनाओं की आग बुझने की बजाय बढ़ती जा रही है। साम्प्रदायिक घटनाओं में हुई अप्रत्याशित वृध्दि को लेकर मध्यप्रदेश सरकार को विपक्ष ने कटघरे में खड़ा कर दिया है। विधानसभा के बजट सत्र के दरम्यान भी इसी मुद्दे पर सरकार को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ी थी। उस दरम्यान कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह ने पत्रकार वार्ता में आरोप लगाया था कि साम्प्रदायिक दंगा फैलाने में सत्ता पक्ष के विधायकों एवं बजरंग दल व विश्व हिन्दू परिषद् के सदस्यों का हाथ है। 14 मार्च को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा में यह ऐलान किया था कि हर कीमत पर साम्प्रदायिक सद्भाव कायम रखा जाएगा। दुर्भाग्य की बात है कि उनके बयान धरे रह गये और दो दिन पूर्व हनुमान जयंती के अवसर पर राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ में साम्प्रदायिक हिंसा फैल गई, जिसमें करोड़ों की सम्पत्तिा का नुकसान और तीन व्यक्तियों की मौत हो गई। वहां अभी भी तनाव है और कर्फ्यू जारी है। दिग्विजय सिंह ने पुन: यहां के दंगों के लिए स्थानीय भाजपा विधायक को जिम्मेदार ठहराया है।

पिछले 26 जनवरी को इंदौर और जबलपुर में साम्प्रदायिक घटनाएं हुई थी, तब से लेकर अब तक प्रदेश के विभिन्न जिलों में दर्जर्नों साम्प्रदायिक घटनाएं हुई हैं। अकेले इंदौर में ही बार-बार घटनाओं की पुनरावृत्तिा हुई है। इंदौर के बारे में तो यह कहा जा रहा है कि दो समुदायों के बीच इस कदर जहर फैलाया जा चुका है कि सद्भाव कायम होने में वर्षों लग जाएंगे। दो दिन पूर्व ही प्रदेश के दो अन्य जिलों छतरपुर एवं जबलपुर में भी साम्प्रदायिक तनाव फैल गया। छतरपुर के नौगांव कस्बे में सुनियोजित तरीके से उन्माद फैलाया गया। कुछ असामाजिक तत्वों ने ईद मिलादुन्नबी पर लगाये गये बैनर और झंडो को एक मजार के पास जला दिया। यहां हनुमान जयंती के लिए बैठक आयोजित की गई थी और उस दरम्यान असामाजिक तत्वों ने यह हरकत कर दी। दोनों समुदायों में हथियारों का प्रदर्शन हुआ पर समय रहते प्रशासन ने मामले में सक्रियता दिखाकर अप्रिय घटना होने से रोक दिया। 1 अप्रैल को जबलपुर में किसी मामूली बात को लेकर दो समुदायों में हुई झड़प में एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गये।

मालवा एवं बुंदेलखड के विभिन्न इलाकों में कई दिनों से तनाव है। राजगढ़ जिले के ही ब्यावरा कस्बे में रंगपंचमी पर साम्प्रदायिक उन्माद फैला था, इसके बावजूद नरसिंहगढ़ में हनुमान जयंती पर निकाले जा रहे जुलूस के लिए पर्याप्त पुलिस बल का इंतजाम नहीं किया गया था। हनुमानगढ़ी से निकला जुलूस जैसे ही जामा मस्जिद इलाके से डबलिया चौराहे के पास आया, नारेबाजी शुरू हो गई और देखते ही देखते दो समुदायों के बीच हिंसा भड़क उठी। इस हिंसा में तीन लोग मारे गये और सौ से ज्यादा दुकानें जलकर राख हो चुकी है। पिछले तीन दिनों से कर्फ्यू जारी है, इस दरम्यान कुछ समय के लिए महिलाओं एवं बच्चों को कर्फ्यू से ढील दी गई थी। वे बाहर का मंजर देखकर रो पड़े। तनाव अभी भी कायम है।

उल्लेखनीय है कि बजट सत्र के दरम्यान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पत्रकारों से कहा था कि विश्व हिन्दू परिषद्, बजरंग दल एवं भाजपा कार्यकर्ता प्रदेश की फिजा बिगाड़ रहे हैं। इंदौर के दंगों के लिए उन्होंने भाजपा विधायक लक्ष्मण सिंह गौड़ को जिम्मेदार ठहराया था। नरसिंहगढ़ में हुए दंगे के लिए उन्होंने पुन: स्थानीय भाजपा विधायक मोहन शर्मा एवं उनके भाई को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री को ऐसी आशंका से वे बहुत पहले ही अवगत करा चुके हैं पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया।

बजट सत्र में प्रदेश में बढ़ती साम्प्रदायिक हिंसा को लेकर उत्तेजक चर्चा हुई थी। ध्यानाकर्षण की सूचना के माध्यम से सज्जन सिंह वर्मा, आरिफ अकील एवं डॉ. सुनीलम् ने इस मुद्दे को उठाया था। उनकी मांग थी कि चर्चा में मुख्यमंत्री रहे पर मुख्यमंत्री ओलावृष्टि से प्रभावित गांवों के दौरे पर चले गये थे। इन विधायकों का आरोप था कि मुख्यमंत्री ने इस गंभीर मुद्दे की अनदेखी की है। इन विधायकों ने कहा था कि दंगे के लिए जिम्मेदार सत्ता पक्ष से जुड़े कार्यकर्ताओं एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिन्दू परिषद् और बजरंग दल के सदस्यों को बचाया जा रहा है। कांग्रेस विधायक आरिफ अकील ने पूर्व की घटनाओं का ब्यौरा पढ़कर सुनाया था। गृह राज्यमंत्री नागेन्द्र सिंह ने जवाब में कहा था कि दंगे के लिए जिम्मेदार लोगों के विरूध्द कार्रवाई करने में सरकार भेदभाव नहीं कर रही है पर विपक्ष इससे संतुष्ट नहीं हुआ था। बाद की चर्चा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कहा था कि प्रदेश में अब दंगे नहीं होंगे पर उनके इस वक्तव्य के बावजूद दंगों का सिलसिला रूक नहीं रहा है। इन घटनाओं के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह हिन्दू सम्मेलनों में दिये जा रहे भड़काऊ भाषणों को जिम्मेदार मान रहे हैं।

राजु कुमार

 
     
  Next Article  
  Social Exclusion Main Page  
  Social Exclusion Archives