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  YOU ARE HERE: Home > Social Exclusion > Harsood: Na Mool, Na Sood, Bas Roti Ke Lale  
     
  हरसूद: न मूल, न सूद, बस रोटी के लाले  
     
 

मध्य प्रदेश में इंदिरा सागर बाँध परियोजना से प्रभावित 250 गाँव में से एक हरसूद की यही कहानी है, जो इस सदी की सबसे अमानवीय और अलोकतांत्रिक विस्थापन त्रासदियों में से एक को झेलने के लिए विवश हुआ. इस विस्थापन के तीन साल पुरे होने को हैं लेकिन अभी तक यहाँ न तो रोजगार के साधनों का इंतजाम किया जा सका है, न नि लोगों को खतरे के निशान की हद से बाहर निकाला जा सका है, अनेक लोगों को अभी तक मुआवजे की प्रतीक्षा है. इस बीच विस्थैत 30 जून को अपनी जड़ों से खदेडे जाने की तीसरी बरसी मानाने जा रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी रोजी-रोटी का कोई इंतजाम सरकार के कागजी दस्तावेजों से बाहर नहीं आ सका है. आलम यह है कि हरसूद से विस्थापित किये गए 5600 परिवारों में से न्यू हरसूद में बमुश्किल 1600 परिवार ही बचे हैं. बाकी कहाँ गए, विस्थापित बच्चों कि शिक्षा, स्वस्थ्य किस कदर प्रभावित हुआ है, इसका सरकार के पास कोई आंकडा नहीं है. इसके साथ ही न्यू हरसूद में पचास से अधिक दलितों के घर हैं, जिनमे से अधिकांश के बच्चों की पढाई दम तोड़ चुकी है.

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दयाशंकर मिश्र

 
     
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