हम यह देख रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन का असर गांव, गांव की जमीन, संसाधनों और व्यक्तियों पर गहराता जा रहा है। हमने महसूस किया कि जलवायु परिवर्तन को अपने आस-पास के वातावरण और हर रोज के मसलों के साथ जोड़कर परिभाषित किए जाने की जरूरत है। इसी जरूरत पर काम करते हुए संयुक्त राष्ट्र सहस्त्राब्दी विकास अभियान के सहयोग से विकास संवाद ने यह पुस्तक तैयार की है। मकसद है कि भुखमरी, गरीबी और स्थायी विकास को जलवायु परिवर्तन के साथ जोड़कर देखना और इस विश्लेषण को व्यापक मंचों पर लाना।
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लेखन: सचिन कुमार जैन
प्रकाशक: विकास संवाद मप्र
संस्करण: प्रथम 2010
संपादन: मणिमाला
आवरण: अमित सक्सेना |