PovertyMedia and Rights Food Security Livelihood Disability Women Rights Globalisation Health Social Exclusion Education Child Rights Environment Right to Information and Governance

 

     
 
| Print this Page
 
     
  YOU ARE HERE: Home > Media and Rights > Ashant Kshetro mein Manviy Mulayon ki Raksha Jarury  
     
 

अशांत क्षेत्रों में मानवीय मूल्यों की रक्षा जरूरी

 
     
 

मध्यप्रदेश के अधिकांश मीडियाकर्मियों को युध्द क्षेत्र या अशांत क्षेत्रों के लिए की जाने वाली रिपोटिंग के लिए बनाए गए नियमों और कानून की गहरी समझ नहीं है। ऐसा होना कोई आश्‍चर्य की बात नहीं है क्योकि प्रदेश में न तो सशस्त्र आंतरिक समस्या है और न ही प्रदेश का कोई हिस्सा अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगता है। इन परिस्थितियों में इस मुद्दे पर पत्रकारो में गहरी समझ विकसित करने के लिए प्रेस इंस्टिटयूट ऑफ इंडिया एवं अंतराष्ट्रीय रेड-क्रॉस सोसायटी ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्‍वविद्यालय के सहयोग से एक कार्यशाला का आयोजन किया।

यद्यपि एकबारगी ऐसा लगता है कि भोपाल में ऐसी कार्यशाला का कोई औचित्य नहीं है। पर कार्यशाला में जिन बिन्दुओं पर चर्चा की गई और बड़ी संख्या में मौजूद पत्रकारों द्वारा उठाये गए प्रश्नों पर जो जवाब आए, इससे अहसास हुआ कि इस विषय पर सभी पत्रकारों में गहरी समझ होना जरूरी है। कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों के साथ-साथ राज्यपाल डॉ. बलराम जाखड़ एवं म.प्र. मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति डी.एम. धर्माधिकारी ने भी अपने वक्तव्य दिये।

डॉ. जाखड़ ने इस मौके पर कहा कि वर्तमान दौर में मीडिया के सामने बड़ी चुनौती है। मीडिया को आमजन के हित में काम करना चाहिए ताकि विकास के अधूरे सपने को पूरा किया जा सके। न्यायमूर्ति धर्माधिकारी ने बताया कि जब वे गुजरात में पदस्थ थे, तब उन्होंने मीडिया की भूमिका को देखा था। उन्होंने बताया कि मीडिया को मानवीय पहलुओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। सनसनीखेज घटनाओं या हिंसक घटनाओं को बार-बार दिखाने से समाज पर, खासतौर से बच्चों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। नि:संदेह इसमें मीडियाकर्मियों को भी जोखिम उठाना पड़ता है।

वरिष्ठ पत्रकार अरविन्द कुमार सिंह ने युध्द क्षेत्र एवं अशांत क्षेत्र में रिपोर्टिंग के अनुभवों को बताया। उन्होंने बताया कि राज्यों के भीतर भी विभिन्न कारणों से संघर्ष होते रहते हैं, वे कई बार अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े होते हैं। इन क्षेत्रों की रिपोर्टिंग में उन पहलुओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए, जिसमें मानव अधिकारों की रक्षा हो सके।

मध्यप्रदेश में इस कार्यशाला के आयोजन से यह लाभ अवष्य मिलेगा कि जो खबरें अशांत क्षेत्रों की होती हैं, उसे यहां की मीडिया में ज्यादा महत्व मिलेगा, चाहे वह उत्तर-पूर्व की खबरें हों या फिर सीमावर्ती राज्यों की। अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय मुद्दों पर, जिसका संबध कहीं न कहीं स्थानीयता से भी जुड़ा होता है, को लेकर एक बेहतर समझ बनाने में यह कार्यशाला काफी सार्थक रही।

राजु कुमार

 
     
  Next Article  
  Media and Rights Main Page