स्वास्थ्य आपदा प्रबंधन में - सामाजिक संस्थाओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका

जानें बीमारी के बारे में!

क्या है कोविड–19?

कोविड–19 एक तेजी से फैलने वाली संक्रामक महामारी है, जो एक नए नोवेल कोरोना वायरस से फैलती है. वायरस यानी विषाणु एक सरल सा कण है जिसका शाब्दिक अर्थ विष होता है. यह अत्यंत सूक्ष्म 01अकोशिकीय कण या अणु होते हैं जो नाभिकीय अम्ल और प्रोटीन से मिलकर गठित होते हैं. यह सभी प्रकार के जीवन को संक्रमित कर सकते है. यह किसी शरीर के बाहर तो मृत समान होते हैं, पर शरीर के अंदर जीवित हो जाते हैं|

कैसे फैलती है यह बीमारी?

  • इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति जब खांसता या छींकता है, तो उस व्यक्ति के मुख से निकला लार या थूक की बूँदें उसके आसपास हवा में फ़ैल जाती हैं और कुछ देर बाद सतह पर या आसपास की वस्तुओं (कुर्सी/टेबल, मोबाइल, बर्तनों आदि) पर गिर जाती हैं.
  • यदि कोई व्यक्ति खांसते या छींकते समय उस व्यक्ति के आसपास में होता है या उस सतह/वस्तुओं को छूता है जहाँ यह बूँदें फैली हैं तो वह व्यक्ति संक्रमित हो सकता है.
  • यह बीमारी सभी आयु-वर्ग के लोगों को हो सकती है पर बूढ़े एवं पहले से रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर एवं ह्रदय रोग आदि गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं या रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है तो उनमें जोखिम अधिक है. उनके लिए यह जानलेवा बन सकती है.

इस बीमारी के मुख्य लक्षण क्या हैं?

  • बुखार होना एवं बदन में दर्द
  • गले में खराश, दर्द या सूखी खांसी आना
  • सांस लेने में तकलीफ
  • इसके अलावा कुछ मामलों में अन्य कई तरह के लक्षण देखे गए हैं.

 बीमारी के लक्षण दिखने पर क्या करें?

यदि किसी व्यक्ति को इस बीमारी के लक्षण हैं या ऐसे क्षेत्रों (देश या विदेश) की यात्रा की है जहाँ बीमारी का फैलाव है तो तुरंत अपने आप को अलग करें यानि दूसरों के सम्पर्क में न रहें. नजदीकी अस्पताल में या हेल्पलाइन 24x7 011-23978046 और निःशुल्क नम्बर 1075 पर संपर्क करें.

क्या कोविड-19 बीमारी का कोई इलाज है?

कोरोना वायरस से फैली कोविड-19 बीमारी का अब तक कोई ईलाज नहीं है. इस महामारी में मरीज के लक्षणों का उपचार किया जाता है यानि मरीज की संक्रमण से जो तकलीफें होती हैं उसे दूर करने के लिए आवश्यक दवाएं दी जाती हैं. यदि लक्षण गंभीर हों तो अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है. इस बीमारी से अधिकांश लोग ठीक हो जाते हैं.

 बचाव सबसे महत्त्वपूर्ण है!

  • साबुन या अल्कोहलयुक्त तरल साबुन से अच्छी तरह से बार-बार अपने हाथ धोएं.
  • छींकते या खांसते समय अपने मुंह एवं नाक को रुमाल से ढकें.
  • अपनी नाक, मुंह या आँख को बार-बार न छुएं.
  • जब तक कि आकस्मिक रूप से आवश्यक न हों, घर से बाहर न निकलें.
  • भीड़ वाली जगहों पर न जाएँ.
  • उन स्थानों की यात्रा न करें जहाँ कोरोना का संक्रमण या कोविड–19 के मरीज पाए गए हैं.
  • अपने और दूसरों (विशेष रूप से यदि कोई खांस या छींक रहा हो) के बीच कम से कम 2 गज यानि 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
  • बीमार लोगों के साथ निकट संपर्क से बचें, खासतौर पर वे लोग जिन्हें खांसी होती है या छींक आ रही हो.

कोरोना के संक्रमण को रोकने एवं बीमारी को दूर करने के लिए अनेक घरेलू नुस्खों एवं अन्य अफवाहों को फैलाया जा रहा है, जो प्रामाणिक नहीं हैं. बहरहाल शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए हमें हर संभव प्रयास करना चाहिए.

भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अपने आपको सुरक्षित रखना

यदि किस आवश्यक कार्य से बाहर ऐसे स्थानों पर जाना पड़ जाये जहाँ अधिक लोग हैं या किसी मरीज की देखभाल करना पड़े तो अपने चेहरे पर तीन परत वाला मास्क लगायें. यदि आपके पास मास्क नहीं है तो बड़ी रुमाल, चुन्नी या किसी साफ कपड़े की तीन परत में मोड़कर चेहरे को ढंके.

 उपचार और संक्रमण के फैलाव को रोकना

कोविड-19 बीमारी से बचाव का एकमात्र उपाय है संक्रमण से बचना यानि संक्रमित व्यक्ति से सम्पर्क में न आना एवं समुदाय में संक्रमण के प्रसारण की श्रृंखला को तोड़ना. यहाँ इन 4 लोक स्वास्थ्य उपायों को समझना एवं उनका पूरी गंभीरता तथा ईमानदारी से परिपालन अत्यंत महत्वपूर्ण हैः

बचाव की मुख्य रणनीतियां

  • शारीरिक दूरी बनाना (सोशल डिस्टेंसिंग)

कोरोना के संक्रमण की रोकथाम का सबसे बेहतर तरीका है सामाजिक दूरी. यह इसलिए आवश्यक है क्योंकि संक्रमण एक से दूसरे व्यक्ति में छींकने, खांसने से निकले लार या थूक के छीटों से होता है. अतः इस रणनीति को अधिक कारगर माना गया कि लोगों एक दूसरे से मिलने से रोका जाए ताकि उन पर वायरस न पहुँच सके. इसलिए सामाजिक दूरी लोगों में संक्रमण के संचरण को कम करेगी.

 क्वारंटाइन (Quarantine) या संगरोध

उन व्यक्तियों को अलग (दूर) रखना जो कोविड-19 से ग्रस्त तो नहीं हुए हैं, लेकिन संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आने की वजह से उनके बीमार पड़ने की संभावना बढ़ गई है. ऐसे लोगों को 14 दिन तक अपने आप को घर में ही बने रहना होगा. उनके लिये किसी भी अन्य व्यक्ति (परिवार सदस्य सहित) से यह दूरी बना कर रखनी ही होगी, अन्यथा संक्रमण फैलने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं.

  • आईसोलेशन (Isolation) या पृथक्करण

जिस व्यक्ति में संक्रमण होने की पुष्टि हो जाती है, उन्हें पृथक या एकांत में रखा जाता है. इस प्रक्रिया में संक्रमित या बीमार व्यक्तियों को असंक्रमित लोगों से पूरी तरह दूर रखा जाता है ताकि असंक्रमित लोगों को बीमारी होने से बचाया जा सके. यह प्रक्रिया अस्पताल या सुविधाओं से युक्त स्वास्थ्य केंद्र में की जाती है जहाँ संक्रमण से बचाव के कारगर उपाय उपलब्ध हों तथा उपचार की पर्याप्त व्यवस्था हो. रोगियों का पृथक्करण संक्रमण के फैलाव को रोकने में बहुत प्रभावी हो सकता है.

  • कन्टेनमेंट (Containment) या संरोधन/नियंत्रण

जब लोगों के बीच सामाजिक दूरी (Social Distancing) बनाये रखने के उपाय अपर्याप्त लगने लगें, कन्टेनमेंट या संरोधन/नियंत्रण का उपाय अपनाना आवश्यक हो जाता है. लोगों के बीच संपर्क को कम से कम करने के आशय से कन्टेनमेंट का हस्तक्षेप संपूर्ण समुदाय, शहर या प्रक्षेत्र में लागू किया जाता है. न्यूनतम आवश्यक सेवाओं को नियंत्रण की इस अवस्था से छूट दी जाती है.

प्रकाशक - विकास संवाद

लेखन एवं संयोजन,  सचिन कुमार जैन,  गुरुशरण सचदेव,  संदीप नाइक,  विश्वम्भर नाथ त्रिपाठी

प्रकाशित- मई, 2020

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