PovertyMedia and Rights Food Security Livelihood Disability Women Rights Globalisation Health Social Exclusion Education Child Rights Environment Right to Information and Governance

 

     
 
| Print this Page
 
     
  YOU ARE HERE: Home > Health > Sawalon Par Sawal Gair Zaroori  
     
  सवालों पर सवाल गैर जरूरी  
     
 

पिछले दिनों इस बात को चर्चा के घेरे में लाने की कोशिश कीर् गई कि भारत सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए तीसरे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के लिए जो प्रश्नावली बनाई गई थी, उसमें कई ऐसे सवाल थे, जो लज्जित करने वाले थे। सवालों पर सवाल उठाकर यह विवेकाधिकार आमजन को दे दिया गया कि वो तय करें कि क्या यह सर्वे सही है?

सर्वे के जिन सवालों पर सवाल उठाए गए हैं, वे सभी सवाल महिलाओं से जुड़े हुए हैं। इन सवालों को किसी महिला के व्यक्तिगत जीवन को आधार बनाकर नहीं देखा जा सकता। संभव है, सामान्य परिस्थितियों में महिलाओं से ऐसे सवाल पूछना उचित नहीं माना जाए पर जब हम स्वास्थ्य की बात करते हैं, तो क्या इसे व्यक्तिगत शारीरिक स्वास्थ्य तक ही सीमित रखा जा सकता है या फिर इसे सामाजिक स्वास्थ्य के दायरे में रखकर देखा जाना चाहिए। सवालों पर सवाल खड़ा कर हम परिणामों पर संदेह पैदा कर रहे हैं पर समाज एवं परिवार में महिलाओं को कई ऐसी दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें कई मानसिक एवं शारीरिक बीमारियों से गुजरना पड़ता है। महिलाओं पर यौन हिंसा सिर्फ अनजाने लोग ही नहीं करते, बल्कि वे परिचितों एवं नजदीकी रिश्ते दारों के लिए आसान शिकार होती है। ऐसे ही कई सर्वे के बाद माना गया कि महिलाओं को हिंसा से बचाने के लिए घरेलू हिंसा विरोधी कानून को लाना जरूरी है।

सर्वे के जिन सवालों को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की गई है, उसे पूछने से पहले उत्तरदाता को विश्वास में लेने और गोपनीयता बरतने की बात की गई है। फिर भी यदि कोई महिला जवाब नहीं देना चाहे तो उसे बाध्य नहीं किया जा सकता। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि यदि हमें पारिवारिक स्वास्थ्य एवं उसकी जटिलता, सामाजिक स्वास्थ्य एवं वैश्वीकरण के प्रभावों से उपजी परिस्थितियों के बाद स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारणों की पड़ताल करनी है, तो ऐसे सवालों को हम खारिज नहीं कर सकते। सवालों को खारिज करने का अर्थ होगा कि हम समस्याओं का सामना नहीं करना चाहते और न ही उसका समाधान चाहते हैं। लगातार ऐसी घटनाओं के बारे में हम सुनते हैं, जो यह दर्शाता है कि महिलाओं को कई तरह की हिंसा का शिकार होना पड़ता है, जिसका उनके स्वास्थ्य से सीधा संबंध होता है और उन घटनाओं की पड़ताल के लिए ऐसे सवालों का उत्तर निकालना अहम है।

फिलहाल यह जरूरी है कि सर्वे में आए परिणामों पर बात की जाए, जिसमें महिला एवं बाल स्वास्थ्य की स्थिति बहुत ही बदतर है। चर्चा में सवालों को नहीं, तीसरे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में आए आंकड़ों को रखने की जरूरत है।

राजू कुमार

 
     
  Next Article  
  Health Main Page  
  Health Archives