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कुपोषण के मुद्दे पर सांसदों की रुचि

 
     
 

कुपोषण को गंभीर मुद्दा मानकर सांसदों एवं विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों ने सिटिजन एलायंस के बैनर तले मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के तीन गांवों का दौरा कर जमीनी हकीकत से रूबरू होने का प्रयास किया। इस दल में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की राज्यसभा सांसद सुश्री सुप्रिया सुले, कांग्रेस (ई) के लोकसभा सांसद सचिन पायलट व राज्यसभा सांसद सुश्री प्रेमा करियप्पा, भाजपा के लोकसभा सांसद शाहनवाज हुसैन, बीजु जनता दल के राज्यसभा सांसद जय पांडा, गायिका सुश्री पिनाज मसानी, अभिनेत्री सुश्री गौरी कार्णिक और वरिष्ठ पत्रकार सुश्री नीरजा चौधरी शामिल थे।

सांसदों ने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के नवीनतम आंकड़ें चौंकाने वाले हैं। देश के 50 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं। ऐसी स्थिति में विकसित राष्ट्र होने का सपना पूरा नहीं हो सकेगा। वे चाहते हैं कि इस मुद्दे को राष्ट्रव्यापी बहस के केन्द्र में लाया जाए, संसद के भीतर और बाहर भी। वे अन्य राज्यों के भी विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर तुलनात्मक अध्ययन कर यह जानने की कोशिश करेंगे कि इसे कैसे खत्म किया जा सकता है और उनकी क्या भूमिका हो सकती है?

उनका दौरा घाटीगांव विकासखंड के दो गांवों रामपुरा और पाटई में तय था, जिसकी जानकारी प्रशासन को लग चुकी थी और उसने यथासंभव यह कोशिश की कि सबकुछ बेहतर नजर आए पर ऐसा हुआ नहीं। काफिला अचानक बिना तय किए हुए एक गांव नीम चंदोवा में प्रवेश कर गया, जो कि नगरपालिक निगम क्षेत्र में ही था। वहां आंगनवाड़ी केन्द्र में कई दिनों से पोषणाहार वितरित नहीं हुआ था व ग्रामीणों ने बताया कि गांव में साल भर से टीकाकरण नहीं हुआ है। रामपुरा में सरकारी आंकड़ों में 106 में से 96 कुपोषित मिलें। संवाददाता से बातचीत में सांसदों ने बताया कि उनका उद्देश्य किसी को दोशी ठहराना नहीं है बल्कि व्यस्था में सुधार लाना है। उन्होंने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि एक आंगनवाड़ी कार्यकत्ता को इतनी अधिक जिम्मेदारी सौंपी जाती है और परिणाम नहीं मिलने पर उसे ही दोशी ठहराया जाता है। उन्होंने इस मुद्दे को राष्ट्रीय मुद्दा बनाने की बात कही। दु:खद बात यह है कि सांसदों व दल में शामिल अन्य सदस्यों की मंशा के विपरित प्रशासन ने नीम चंदोवा की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के खिलाफ कार्रवाई कर दी।

राजु कुमार

 
     
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