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नौकरशाही की उदासीनता का नया नमूना

 
     
 

क्या किसी गाँव में शिक्षकों के रिक्त पद भरे जाने की मांग करना अपराध है? आवेदन, निवेदन, ज्ञापन के ज़रिये अपनी मांग प्रशासन के जिम्मेदार अफसरों तक पँहुचाने के १५ दिनों तक समाधान का इंतजार करना पर्याप्त नहीं है? समाधान न होने की दशा में पूर्व घोषणा के अनुसार पूर्व निर्धारित तिथि को अनोखे तरीके से ग्रामवासियों द्वारा विरोध प्रदर्शन कर अपनी मांग की पूर्ती के लिए प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करना जुर्म है?

ये वे महत्वपूर्ण सवाल हैं जो इन दिनों मध्यप्रदश के आदिवासी बहुल झाबुआ जिले से राजधानी भोपाल तक शिक्षा के गलियारों में गूंज रहे हैं. झाबुआ जिले के पेटलावद विकासखंड के कालीघाटी गाँव के स्कूल में पर्याप्त शिक्षकों की मांग करने वाले ग्रामवासियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर विरोध प्रदर्शन का जो तरीका अपनाया गया है उससे प्रशासन की नाराज़गी बढ़ गयी है. हालत ऐसे बन गए हैं की रिक्त शिक्षकों के पदों के कालीघाटी के स्कूल में पूर्ति करने से ज्यादा चिंता प्रशासन उन सामजिक कार्यकर्ताओं, ग्रामवासियों की कर रहा है जिन्होंने विरोध प्रदर्शन किया है. शिक्षकों को पर्याप्त संख्या में पदस्थ करने पर ध्यान देने से अधिक तेजी से ध्यान विरोध प्रदर्शन करने वालों पर कानूनी कार्यवाही करने में दिया जा रहा है.

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