सिवनी जिले की पथरई पंचायत के अल्केसुर गाँव के आरोबाई यूं तो खुद निरक्षर हैं किन्तु उन्होंने अपने बच्चों की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए बड़े जातां से उन्हें स्कूल भेजना शुरू किया पर अब उन्हें शंका है की वास्तव में शिक्षा के हरण उनके बच्चे के जीवन में बदलाव आएगा. उनके भीतर शिक्षा व्यवस्था के प्रति गहरा क्रोध फनफना रहा है इसलिए नहीं की वे खुद अनपढ़ रह गईं बल्कि इसलिए की आज ही शिक्षा व्यवस्था ही भविष्य के शोषक और भ्रष्टाचारी नागरिकों का निर्माण कर रही कई. अल्केसुर गाँव के शासकीय स्कूल में प्राथमिक स्टार के 80 बच्चे परीक्षा देकर ही दबाव से मुक्त नहीं हो जाते हैं. उन्हें हर परीक्षा के बाद (यानि तिमाही और छमाही भी) परीक्षा के परिणाम जानने के लिए स्कूल शिक्षक को 5 रुपये से 25 रुपये तक की रिश्वत चुकानी पड़ती है इसके बाद ही उन्हें परिणाम बताया जाता है. इस साल तो रिश्वत न मिलने के कारन एक महीने तक परीक्षा परिणाम ही घोषित नहीं किये गए. इस गाँव के लोग गुस्से में तो हैं पर सरकारी व्यवस्था का चरित्र उन्हें इस भ्रष्टाचार को स्वीकार करने के लिए मजबूर कर देता है. अल्केसुर के 80 बच्चे अनजाने में ही यह सवाल पूछ लेते हैं क्या यह हमारे साथ किया गया अपराध नहीं है. यदि है तो फिर अपराधी कौन है और उसे सजा कौन देगा?
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सचिन कुमार जैन |