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आज यह सवाल विकराल रूप ले चूका है कि क्या वास्तव में मध्यान्ह योजना गरीबी और उपेक्षा के साये में जी रहे बच्चों को शिक्षा और पोषण का बुनियादी अधिकार दिला पा रही है? यह सवाल इस योजना के वर्त्तमान स्वरुप और चरित्र के सन्दर्भ में महत्वपूर्ण हो जाता है. मध्यप्रदेश के श्योरपुर जिले के गोठरा-कपूर गाँव के सरकारी स्कूल में 108 बच्चों पर एक शिक्षक कि नियुक्ति है. शिक्षक गजराज सिंह गुर्जर इस गाँव से 22 किमी दूर पैदा में रहते हैं और माह में दो से तीन दिन ही स्कूल का भ्रमण करते हैं. यही वे दिन होते हैं जब बच्चों को मध्यान्ह भोजन मिल पता है. स्कूल के पालक-शिक्षक संघ के अध्यक्ष श्यामलाल आदिवासी ने बहुत कोशिशें की पर व्यवस्था के लापरवाह और भ्रष्ट चरित्र के चलते कोई बदलाव नहीं हुआ. उन्हें पता है कि अध्यक्ष, यानि उनके, हस्ताक्षर राशन कि रसीद पर नहीं हैं फिर भी शिक्षक नियमित रूप से राशन प्राप्त करते हैं. पर वे शिकायत नहीं करते; क्या होगा, ज्यादा से ज्यादा निलंबन होगा. चार साल पहले भी वह निलंबित हुआ था तब एक साल तक स्कूल बंद रहा था. प्रशासन ने कोई नयी नियुक्ति नहीं की और बाद में गजराज सिंह को ही बहाल कर दिया. कुछ नहीं बदला.
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सचिन कुमार जैन |
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