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अप्रशिक्षित शिक्षक, अनुत्तीर्ण बच्चे और असफल राज्य

 
     
 

जीवन में अगर समानता और सम्मान चाहिए तो शिक्षा उसके लिए बुनियादी शर्त है किन्तु मध्यप्रदेश के बच्चों के लिए अब भी शिक्षा एक चुनौती ही बनी हुई है. राज्य के विदिशा जिले के नटेरन विकासखंड के 282 स्कूलों में से 102 स्कूल ऐसे हैं जहाँ वर्ष 2006-07 के दौरान शिक्षा का प्रभाव जीवन में नहीं उतर पाया. इन स्कूलों का एक भी बच्चा प्राथमिक स्तर की परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाया. इसी सत्र में राज्य के स्तर पर सौ में से 41 बच्चे उत्तीर्ण होने का प्रमाण पत्र हासिल नहीं कर सके और यह ऐसा वर्ष है जब प्रतिभावान छात्रों की सूची में सरकारी स्कूल का एक भी छात्र शामिल नहीं है. अगर स्चूली शिक्षा का राज्य और समाज में कोई महत्व है तो शिक्षा व्यवस्था की स्थिति, खासतौर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की स्थिति, चिंताजनक नज़र आ रही है. राज्य के 46 प्रतिशत शिक्षक बिना प्रशिक्षण अपना कम कर रहे हैं. संविदा शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों को वास्तव में शिक्षक का दर्जा देने का निर्णय वास्तव में व्यवस्था में समानता के अधिकार के लिए देर से लिया गया निर्णय है. अब वास्तव में सवा लाख अस्थाई-अधूरे शिक्षकों को सम्मान और समानता का अधिकार मिलेगा. पर सवाल यह है की क्या वास्तव कें इससे शिक्षण की गुणवत्ता में सुधर आयेगा.

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सचिन कुमार जैन

 
     
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